Sunday, 1 October 2017

कौन कौन लोग GST वसूल सकते हैं , जाने विस्तार से

  आजकल अपने पूरे देश ( भारत )में गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स ( GST ) लागू हो चुका है। चारों तरफ सिर्फ इसी का बोल बाला है। इसी में बहुत से दुकानदार या होटल या कंपनी वाले धोखाधड़ी भी कर रहे हैं। जिन दुकानदारों को GST वसूलने का अधिकार नहीं है वे भी आम जनता को जानकारी न होने की वजह से  इसे वसूल रहे हैं। सही जानकारी न होने के कारण पब्लिक उनके द्वारा ठगी जा रही है। मैं अपने इस लेख में बताउंगा कि वास्तव में कौन कौन दुकानदार जीएसटी वसूलने का अधिकार रखता है और कौन नहीं। क्योंकि हर दुकानदार को यह अधिकार नहीं है कि वह जीएसटी वसूले, भले ही वह बिल कम्प्यूटर से ही क्यूँ न दे।
    आप सब की जानकारी के लिए मैं बता दूंँ कि केवल वही दुकान वाले जीएसटी वसूल सकते हैं जो अपना रजिस्ट्रेशन जीएसटी में करवायें हों । मगर यह कैसे जानेंगे कि किस दुकानदार ने अपना रजिस्ट्रेशन करवाया है और किसने नहीं। तो आप इसका पता आसानी से लगा सकते हैं।
   इसके लिए आपको सिर्फ दो काम करने होंगे। पहला यह कि क्या सम्बन्धित दूकानदार को जीएसटी वसूलने का अधिकार, और दूसरा  क्या वह  सही रेट से जीएसटी ले रहा है?
     मान लें कि आप किसी दूकान में जाकर कुछ खरीदारी करते हैं, तो जो बिल आप को मिलता है उसी में जीएसटी बिल भी जुड़ा होता है ,यदि वह दूकानदार अपना रजिस्ट्रेशन करवाया है । अब यदि आपको कुछ संदेह हो रहा है तो उसे आप चंद मिनटों में चेक कर सकते हैं। अगर कोई आपसे जीएसटी वसूल रहा है तो उसे आपको बिल जरूर देना चाहिए। इसी बिल पर जीएस टीन (GSTIN) भी दिया होता है। इसी नम्बर से आप जान सकते हैं कि वह दूकानदार, होटल अथवा कंपनी रजिस्टर्ड है या नहीं। इसे आप सरकार की जीएसटी की वेबसाइट पर चेक कर सकते हैं। 
    इसका लिंक है -https://services.gst.gov.in/service/search to
     इस पर आपको पन्द्रह अंकों का जीस टीन नम्बर डाल कर (जो बिल पर छपा होता है ) सर्च करना होगा। फिर उस दूकानदार की सारी डिटेल आप के सामने आ जायेगी।
   जीएस टीन 15अंकों का नम्बर होता है, जो रजिस्ट्रेशन कराने वाले हर दूकानदार को मिला होता है। इसमें अंक और अंग्रेजी के अक्षर होते हैं। जिसके पहले के दो अंक राज्य के कोड होते हैं। अगले 10 नम्बर उस दूकानदार या कंपनी के पैन नंबर होते हैं। इसमें लिखे गये 13 वें नम्बर से यह पता चलता है कि उस दूकानदार या होटल या कंपनी ने कितने रजिस्ट्रेशन करवायें हैं। 14 वाँ नम्बर हमेशा Z होता है। अगर दूकानदार या कम्पनी के दो से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हैं तो Z की जगह वो अंक आ जाता है। 15 वाँ नम्बर चेक कोड होता है जो खामियां पकड़ने के लिये होता है।
    साधारणतया आप को रोजमर्रा की चीजों पर लगने वाले रेट की जानकारी होनी चाहिये, फिर भी यदि आप  को जानकारी नहीं है तो आप इसे सेन्ट्रल बोर्ड आफ एक्साइज एण्ड कस्टम की वेबसाइट पर चेक कर सकते हैं, जिसका लिंक है- -https://cbec-gst.gov.in/gst-goods-service-rates.html
   अब यदि दूकानदार गलत रेट से जीएसटी वसूल रहा हो या बिना रजिस्ट्रेशन के ही जीएसटी लगा रहा हो तो आप इसकी शिकायत सीधे ईमेल से कर सकते हैं।
    ईमेल है --helpdesk@gst.gov.in

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