Sunday, 15 October 2017

computer assembling ( business of low capital )

                                               कम  पैसों का शानदार बिजनेस 
  हमेशा  हम कम पूँजी  होने का रोना रोते हैं ,यदि वास्तव में हम कुछ करना चाहते हैं तो रास्ते अपने आप ही मिल जाते हैं। आज हम जानेंगे की कम पैसों में ज्यादा मुनाफा कैसे कमाया जा सकता है। 
   सबसे पहले मैं  आपको एक छोटा सा उदहारण दे रहा हूँ।  आप और सभी लोग जानते हैं की यह समय टेक्नोलॉजी का है। जिसमे सबसे ज्यादा प्रयोग मोबाइल का किया जा रहा है। प्रायः अमीर हो गरीब ,औरत हो मर्द सबके हाथ में मोबाइल देखा जा सकता है। यह एक तरह से हम सबके जिंदगी का एक हिस्सा बन गया है। अब तो बिना इसके बहुत से लोगों को बेचैनी होने लगती है। यह शायद आधुनिक खोजों में सबसे जानदार खोज है।
    सभी जानते हैं जो चीज जब चलेगी तो ख़राब भी होगी। ख़राब होने के बाद उसे रिपेयर भी करवाना पड़ता है। जिसे कोई जानकार ही कर सकता है। हममें  से बहुत से लोग पढ़ लिख कर बड़े शहरों या विदेशों में जा रहे हैं। जहाँ जाने के लिए भारी रकम खर्च करते हैं। जाने के बाद जब सच्चाई सामने आती है तब अफ़सोस करते हैं।  मुझे उन बेरोजगारों से कहना है कि बहुत ही कम खर्च में मोबाइल रिपेरिंग का कार्य सीखा जा सकता है। जिसे सीख कर आप अपना खुद का मोबाइल शॉप खोल सकते हैं ,जिसमें रिपेयरिंग से लेकर न्यू मोबाइल सेलिंग कर सकते हैं।
      आप जब एक बार ग्राहकों का विश्वास जीत लेंगे फिर आपका एक बढ़िया सा कारोबार चल पड़ेगा। इसमें मेन बात है की आप ग्राहकों का विश्वास जीतेंगे कैसे , तो उसका एक आसान फार्मूला है ईमानदारी। 
     जैसे मान लीजिये आपने रिपेयरिंग का कोर्स कर के शॉप खोल ली। आपके पास कोई कस्टमर आता है कि भाई मेरे मोबाइल का डिस्प्ले काम नहीं कर रहा है ,अब आपका कार्य शुरू होता है कि मोबाइल को चेक करके उसकी कमी बतायें। यहाँ पूरी ईमानदारी बरते कि यदि वास्तव में उसका डिस्प्ले बदलना होगा या आप उसे किसी अन्य तरीके से ठीक कर सकते हैं। जो भी करें उसे साफ साफ ग्राहक को बता दें। यदि किसी पार्ट को लगा रहा हैं तो भी ग्राहक को बतायें की भाई यह पार्ट इतने पैसे का है जिसे आप खुद लाकर मुझे दे दें और मैं इसे लगा दूँगा , हाँ मेरी सर्विस चार्ज मुझे दे दीजियेगा। यकीन मानिये अगली बार वह ग्राहक निश्चित तौर पर आपके ही शॉप पर आयेगा ,चाहे उसे रिपेयरिंग करानी हो या नया कोई चीज खरीदना हो। जैसे जैसे आपकी आय बढ़े आप अपने शॉप का ब्रांचेज बढ़ा सकते हैं ,और आप देखेंगे कि कुछ ही दिनों में यही छोटा सा कारोबार कैसे बड़ा बन गया। 
          अब आते हैं थोड़े बड़े बिजनेस पर  ( कम्प्यूटर असेम्ब्लिंग  बिजनेस )
      इस  बिजनेस को भी कम पैसों में शुरू किया जा सकता है, और अच्छी कमाई की जा सकती है। इसके लिए सरकारी सहायता भी मिल रही है। सरकार के मुद्रा स्कीम के अंतर्गत इस बिजनेस के लिए 70 % तक आर्थिक सहायता मिल जाती है। यदि आपके पास 2 लाख रूपये हों तो इसे आसानी से शुरू किया जा सकता है। कंप्यूटर असेम्ब्लिंग  बिजनेस के लिए सरकार ने जो स्ट्रक्चरिंग की है उसके अनुसार सभी खर्चों को काटने के बाद सालाना लगभग 3 लाख रूपये कमाया जा सकता है। बिजनेस स्टार्ट करने के लिए पूरा खर्च 8 सें 9 लाख रूपये तक होगा। इसमें मुख्य खर्च है किराये का भवन या जमीन और हर तरह की मशीनरी जो लगभग 1 लाख रुपये के आसपास होती है। 
       वर्किंग पूँजी में लगभग 8  से 9  लाख खर्च होंगे जिसमें सभी तरह के रॉ मैटेरियल जैसे  मदरबोर्ड ,ए टी एक्स  कैबिनेट ,माउस ,की बोर्ड ,मॉनिटर और लेबर की मजदूरी ,पैकेजिंग ,बिजली का बिल ,मकान या जगह का किराया ट्रांसपोर्टिंग इत्यादि का खर्च शामिल है। 
      इस बिजनेस को शुरू करने के लिए आपको अपने पास से लगभग 270000 रूपये लगाने पड़ेंगे। यह पुरे प्रोजेक्ट के पूंजी का 30 % है।  बाकि 70 % रकम आपको बैंक से लोन के रूप में मिल जायेगा। 
                   इस तरह होगा आपको लाभ 
   कास्ट ऑफ प्रोडक्शन    92 . 82  लाख रूपये सालाना 
    बिक्री                              1 . 04 करोड़ रुपये सालाना 
     ग्रास प्रॉफिट                  9 . 13 लाख रूपये सालाना 
     नेट प्रॉफिट                   3 . 01 लाख रूपये सालाना 
            इस तरह से देखा जाय तो आपका सारा इन्वेस्टमेंट की हुयी रकम 3 साल में निकल जाएगी। चूँकि कम्प्यूटर की डिमांड घटने के बजाय बढ़ ही रही है इसलिये यह बिजनेस एक फायदे का बिजनेस हो सकता है। 
      कम्प्यूटर असेम्ब्लिंग का बिजनेस शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत आप किसी भी बैंक में अप्लाई कर सकते हैं। इसके लिए आपको एक फार्म भरना होगा जिसमें अपना नाम ,पता ,बिजनेस एड्रेस ,अपना शिक्षा ,मौजूदा इनकम और कितना लोन चाहिए  आदि की जानकारी देनी होगी।  इसमें किसी तरह की प्रोसेसिंग फीस या गारंटी फीस नहीं देनी होती है।  इसमें जमीन या भवन का होना जरुरी है , भले ही वह किराये का ही क्यों ना हो।  जिसका किराया वर्किंग कैपिटल में जोड़ा गया है। 

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