आज कल बाजार में सोया मिल्क की अच्छी खासी डिमांड है ,विशेषकर युवाओं में इसका काफी क्रेज है। ऐसे समय में आप यदि कुछ नया बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो सोया मिल्क यूनिट लगा सकते हैं। चूँकि इस प्रोजेक्ट को सरकार का भी सपोर्ट है है , ऐसे में आप चाहें तो सरकार के सपोर्ट का फायदा उठा सकते हैं। इसके लिए आपको एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनानी पड़ेगी ,ताकि आप इसी रिपोर्ट के आधार पर सरकारी सपोर्ट और लोन के के लिए अप्लाई कर सकें। कोई भी प्रोजेक्ट रिपोर्ट ही बताती है की सम्बंधित बिजनेस के आप कितने जानकर हैं। बैंक भी समझ जाता है की लोन क्यों दिया जाय।
अब यदि आप इस यूनिट को लगाने के प्रति गंभीर हैं तो सबसे पहले आपको इसके प्रोडक्शन प्रोसेस के बारे में पता होना चाहिए। नेशनल स्माल इंडस्ट्रीज कार्पोरेशन की रिपोर्ट के अनुसार आपको सोयाबीन के बीजों का इंतजाम करना होगा , जिसको आप बाजार से खरीद सकते हैं या किसानों से कांट्रेक्ट फार्मिंग करवा कर भी प्राप्त कर सकते हैं। बीजों का इंतजाम हो जाने के बाद ,जितना भी बीज है उससे तीन गुना ज्यादा नार्मल पानी में 4 से 6 घंटे तक एक गर्म तापमान में एक डिब्बे में भिगोना पड़ेगा। उसके बाद 8 से 12 घंटे तक ठन्डे तापमान में रखना होगा। अब भीगे हुए सोयाबीन के बीज को एक ग्राइंडर और कुकिंग मशीन में रखना होगा ,फिर उसे 120 डिग्री तापमान में 10 मिनट तक रखना पड़ेगा। इसके बाद आप आउटलेट वाल्व को खोल कर अपने हिसाब से पैकिंग कर सकते हैं।
एन एस आई सी की प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार आपको एक छोटी यूनिट लगाने के लिए मात्र 100 वर्गमीटर जमीन की जरुरत पड़ेगी इसमें से 75 वर्गमीटर एरिया कवर्ड रखना होगा। इसके बाद आपको मशीनरी तथा इक्विपमेंट के नाम पर एक ग्राइंडर या कूकर , बॉयलर ,मैकेनिकल फ़िल्टर प्रेस ,टोफू बॉक्स,सोकिंग टैंक की जरुरत पड़ेगी।
प्रतिवर्ष 175000 लीटर सोयामिल्क के उत्पादन का अनुमान लगाया गया है ,इस हिसाब से तीन महीने का कार्यशील पूँजी ,मशीनरी एवं इक्विपमेंट , कच्चे माल , वर्कर की सेलरी ,यूटिलिटी इत्यादि पर कुल अनुमानित खर्च लगभग 11. 60 लाख रुपये है।
यदि इस प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर सरकार के माध्यम लोन के लिए आवेदन करते हैं तो सम्पूर्ण इन्वेस्टमेंट (11. 60 लाख ) का 80 %तक लोन मिल जायेगा। सरकार आपको कोलाट्रल फ्री लोन दिलाने में भी मदद करेगी।
उत्पादन बढ़ने के उपरांत आप इसे विदेशों में भी लांच करके ज्यादा पैसा कमा सकते हैं। बिजनेस वही सफल होता है जो समय के हिसाब से किया जाय और डिमांड के अनुरूप उसकी क़्वालिटी हो।
अब यदि आप इस यूनिट को लगाने के प्रति गंभीर हैं तो सबसे पहले आपको इसके प्रोडक्शन प्रोसेस के बारे में पता होना चाहिए। नेशनल स्माल इंडस्ट्रीज कार्पोरेशन की रिपोर्ट के अनुसार आपको सोयाबीन के बीजों का इंतजाम करना होगा , जिसको आप बाजार से खरीद सकते हैं या किसानों से कांट्रेक्ट फार्मिंग करवा कर भी प्राप्त कर सकते हैं। बीजों का इंतजाम हो जाने के बाद ,जितना भी बीज है उससे तीन गुना ज्यादा नार्मल पानी में 4 से 6 घंटे तक एक गर्म तापमान में एक डिब्बे में भिगोना पड़ेगा। उसके बाद 8 से 12 घंटे तक ठन्डे तापमान में रखना होगा। अब भीगे हुए सोयाबीन के बीज को एक ग्राइंडर और कुकिंग मशीन में रखना होगा ,फिर उसे 120 डिग्री तापमान में 10 मिनट तक रखना पड़ेगा। इसके बाद आप आउटलेट वाल्व को खोल कर अपने हिसाब से पैकिंग कर सकते हैं।
एन एस आई सी की प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार आपको एक छोटी यूनिट लगाने के लिए मात्र 100 वर्गमीटर जमीन की जरुरत पड़ेगी इसमें से 75 वर्गमीटर एरिया कवर्ड रखना होगा। इसके बाद आपको मशीनरी तथा इक्विपमेंट के नाम पर एक ग्राइंडर या कूकर , बॉयलर ,मैकेनिकल फ़िल्टर प्रेस ,टोफू बॉक्स,सोकिंग टैंक की जरुरत पड़ेगी।
प्रतिवर्ष 175000 लीटर सोयामिल्क के उत्पादन का अनुमान लगाया गया है ,इस हिसाब से तीन महीने का कार्यशील पूँजी ,मशीनरी एवं इक्विपमेंट , कच्चे माल , वर्कर की सेलरी ,यूटिलिटी इत्यादि पर कुल अनुमानित खर्च लगभग 11. 60 लाख रुपये है।
यदि इस प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर सरकार के माध्यम लोन के लिए आवेदन करते हैं तो सम्पूर्ण इन्वेस्टमेंट (11. 60 लाख ) का 80 %तक लोन मिल जायेगा। सरकार आपको कोलाट्रल फ्री लोन दिलाने में भी मदद करेगी।
उत्पादन बढ़ने के उपरांत आप इसे विदेशों में भी लांच करके ज्यादा पैसा कमा सकते हैं। बिजनेस वही सफल होता है जो समय के हिसाब से किया जाय और डिमांड के अनुरूप उसकी क़्वालिटी हो।
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